Tuesday, May 26, 2026

 मैं उसे ढूंढ नहीं पाऊंगा 

कहीं अगर मिल भी जाये 
तो पहचान नहीं पाऊंगा 

लेकिन मन में रखता हूँ सहेज कर, एक स्मृति 
किसी सुगंध 
किसी स्पर्श 
किसी एहसास की तरह 

जिसे शब्दों में ढालो, 
तो कुछ बाकी रह जाता है   
याद करो तो रंग उड़ने लगते हैं 
गौर करो तो आकार मिटने लगते हैं  

लेकिन वो पूर्ण है, वहां 
जहाँ समय रुका हुआ है 
सभी कण और क्षण हैं 
विशुद्ध संभावनाओं से भरे 
शब्दों, रंगों और आकारों 
के प्रपंचों से परे 

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