Monday, May 21, 2007

My experiments with love - an autobiography



मेरे िजगर पर वार कर गये
उनकी नज़रों के ballastic missile
यूं िखंचा मेर िदल उनके िदल की तरफ
जैसे nucleus की तरफ िंखचता है nucleophile

देखते ही देखते िदलों का ऐसा rearrangement हो गया
मेरे िदल का delocalisation permanent हो गया
जहां कभी था एक धड़कता हुआ िदल
मेरे सीने का वो orbital अब vacant हो गया
धीरे धीरे िदल का िफर िदल से agreement हो गया
और प्यार का bond, coordinate से covalent हो गया

पर िजस reaction की feasibilty पर मुझे इतना गुमान था
उस reaction की reversibility का नहीं तिनक अनुमान था

अब तनहा पड़ा इस jar में,
सोच रहा संसार में
stability और affinity में
कौन िकसका आधार है
periodic table में जो नीचे हैं
bonding में भी वो पीछे हैं
क्यों छीने हे प्रभु तुमने
उनके सारे अिधकार हैं

5 comments:

!~~Br@nDy~~! said...

hahaha..nalin bhaiya... pyaar ki chemistry ka naya paath padha diye ho :)

sumit said...

i always loved it.
especially the day u recited in KY infront of manjari :)
Those were the days!!

Nalin said...

thanx sumit!!
i love ur comments, they hav a way of taking me back into time :)

mridani said...

nalin jee aap toh chaa gaye...:)

gudiya said...

:o!!!! honestly speaking it was bouncer for me..:D